Why Up Cm Yogi Adityanath Is Targeting Maharashtra Cm Uddhav Thackeray – उद्धव ठाकरे को क्यों कोस रहे हैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ?

0
43


उद्धव ठाकरे-योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)
– फोटो : PTI

ख़बर सुनें

लाख टके का सवाल है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को क्यों कोस रहे हैं? महाराष्ट्र सरकार के एक कैबिनेट मिनिस्टर का कहना है कि यूपी के मुख्यमंत्री अपनी विफलता से विचलित हैं। इसे छिपाने के लिए अब वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का कंधा तलाश रहे हैं। 

कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर हमला तेज कर दिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मुख्यमंत्री के राजकाज के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बड़े-बड़े दावे भी कुछ संदेह को बढ़ाने वाले इशारे कर रहे हैं।

क्या है मुख्यमंत्री का दावा?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह कहकर सनसनी फैला दी कि यदि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने गरीब अप्रवासियों के साथ सौतेली मां जैसा व्यवहार किया होता तब भी वह (मजदूर) महाराष्ट्र न छोड़ते। इसके साथ मुख्यमंत्री ने कहा कि अब किसी भी राज्य को उत्तर प्रदेश के कामगार यू हीं खैरात में नहीं मिलेंगे। 

इसके लिए राज्यों को उत्तर प्रदेश सरकार से अनुमति लेनी होगी। योगी आदित्यनाथ मे माइग्रेशन कमीशन गठित करने का फैसला किया है। यह आयोग श्रमिकों को रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और पुनर्वास की सुविधा देने पर काम करेगा। सरकार श्रमिकों से फार्म भरवाकर उनकी कुशलता का खाका तैयार करा रही है।

श्रमिकों के बीमा की योजना है और उनसे मनरेगा, चीनी मिल, ईंट भट्ठा, एमएसएमई और रेडीमेड गारमेंट समेत अन्य क्षेत्रों में  काम लेने की योजना तैयार हो रही है। खुद मुख्यमंत्री प्रदेश में हर रोज गरीब प्रवासियों के लिए रोजगार देने का दावा कर रहे हैं।

संक्रमण को लेकर मुख्यमंत्री की छटपटाहट

योगी आदित्यनाथ का कहना है कि महाराष्ट्र के मुंबई से आने वाले 75 फीसदी अप्रवासी गरीब मजदूरों में कोविड-19 संक्रमण है। दिल्ली से आने वाले 50 फीसदी और अन्य राज्यों से आने वाले 25-30 फीसदी में व्यापक संक्रमण है। यह हमारे लिए चुनौती बना हुआ है। इसके लिए 75 हजार मेडिकल टीमें स्क्रीनिंग और अन्य का काम कर रही है। मुख्यमंत्री का कहना है कि वह जल्द ही प्रदेश में कोविड-19 को काबू में कर लेंगे।

कई जिलों में हालत खराब है

यूपी के तरीब सभी जिलों में कोविड-19 के पॉजिटिव मामले बढ़ रहे हैं। ये मामले शहर में इक्का-दुक्का लेकिन गांवों से दर्जन की संख्या में आ रहे हैं। जौनपुर, बनारस, आजमगढ़, भदोही, चंदौली समेत तमाम जिलों की यही स्थिति है। एक दिन पहले बनारस में 18 मामले एक दिन में मिले। इससे पहले दो-चार मामले ही मिलते थे। 

इनमें से 17 मामले गांवों में और एक शहर में मिला। इस स्थिति के चलते प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में संक्रमितों को रखने, उचित इलाज देने की जगह नहीं है। जांच का दबाव संभाल पाने में प्रशासन को पसीना आ रहा है। अप्रवासियों की आर्थिक स्थिति भी कमजोर है। बताते हैं प्रदेश के अन्य हिस्से में भी इसी तरह के हालात हैं।

क्वारंटीन सेंटर की दशा तो और भी खराब

बनारस से संजय सिंह, जौनपुर से शंकर प्रताप, आजमगढ़ से राजेश चतुर्वेदी, चंदौली से अनुराग सिंह बताते हैं कि उनके जिले में प्राथमिक विद्यालयों या स्कूलों को क्वारंटीन सेंटर में बदला गया है। इनमें दो समस्याएं बहुत बड़ी हैं। पहली समस्या पानी की उपलब्धता और दूसरी इन स्कूलों में टॉयलेट की है। तमाम लोग खेत, पाही (घर से दूर ट्यूबेल आदि जैसे रहने के स्थान), खेत या बगीचे में क्वारंटीन हैं। 

लगभग हर जगह से खबर है कि सरकार के स्तर से उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन की स्थिति जेल के खाने से भी खराब है। दूसरे जहां भी पॉजिटिव मामले बढ़ रहे हैं, सरकार बांस-बल्ली लगाकर उसे घेर दे रही है। इन सेंटरों में उपचार आदि की समुचित व्यवस्था भी नहीं है। बताते हैं प्रवासियों के आने के बाद से उत्तर प्रदेश के जिलों की स्थिति काफी खराब हो रही है।

…लेकिन प्रवासियों को लाने की पहल तो यूपी ने ही की थी

गौर कीजिए, मार्च का महीना, 25 मार्च को पहला लॉकडाउन घोषित होने के बाद सबसे पहले दिल्ली के आनंद विहार से मजदूरों को लाने के लिए 1100 बसें भेजने की घोषणा योगी आदित्यनाथ ने ही की थी। मुख्यमंत्री के इस कदम का बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विरोध किया था। प्रधानमंत्री को मन की बात कार्यक्रम में इसके लिए माफी मांगनी पड़ी थी। 

कुछ समय बाद कोटा से यूपी के छात्रों को लाने की पहल भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ही की थी। प्रधानमंत्री से तीसरे दौर की वीडियो कांफ्रेसिंग में चर्चा के बाद मुख्यमंत्री ने देश के तमाम राज्यों से गरीब प्रवासी मजदूरों को लाने के लिए प्रटोकॉल बनाना, उन्हें लाने की योजना पर काम शुरू कर दिया था। 

इसी से मिलते जुलते प्रोटोकॉल को कुछ और राज्यों ने अपनाया था। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री ने बड़बोले स्वभाव में कहा ज्यादा, किया कम। लिहाजा मजदूर पैदल ही सैकड़ों किमी चल कर गांव पहुंचने लगे। गरीब मजदूरों को लेकर न केवल राज्य सरकार की बल्कि केंद्र सरकार की नीति भी फेल रही।

….तो निशाने पर उद्धव ही क्यों?

उद्धव इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के भी निशाने पर आ चुके हैं। महाराष्ट्र में कोरोना के संक्रमित देश में सबसे अधिक हैं। मरने वालों का आंकड़ा भी अधिक है। दूसरे उद्धव शिवसेना के प्रमुख हैं। शिवसेना भी हार्डकोर हिंदुत्व में भरोसा करती है। योगी भी इसी विचार धारा में गिने जाते हैं। 

दोनों नेताओं के आपसी समीकरण भी निराले हैं। महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं की भीड़ द्वारा हत्या के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्धव ठाकरे को नसीहत दी थी। इसके कुछ दिन बाद यूपी के बुलंदशहर में साधु की हत्या पर उद्धव ठाकरे भी नसीहत देने से नहीं चूके।

सार

  • संसाधन कम, बीमार ज्यादा, चुनौती बड़ी, संभले तो कैसे?
  • गांवों की क्वारंटीन व्यवस्था ने और बदतर बनाए हालात
  • प्रवासी मजदूरों को संभालना राज्य सरकार के लिए टेढ़ी खीर
  • जौनपुर, आजमगढ़, बनारस, भदोही, मिर्जापुर समेत हर जिले से मिल रहे हैं संक्रमित

विस्तार

लाख टके का सवाल है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को क्यों कोस रहे हैं? महाराष्ट्र सरकार के एक कैबिनेट मिनिस्टर का कहना है कि यूपी के मुख्यमंत्री अपनी विफलता से विचलित हैं। इसे छिपाने के लिए अब वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का कंधा तलाश रहे हैं। 

कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर हमला तेज कर दिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मुख्यमंत्री के राजकाज के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बड़े-बड़े दावे भी कुछ संदेह को बढ़ाने वाले इशारे कर रहे हैं।

क्या है मुख्यमंत्री का दावा?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह कहकर सनसनी फैला दी कि यदि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने गरीब अप्रवासियों के साथ सौतेली मां जैसा व्यवहार किया होता तब भी वह (मजदूर) महाराष्ट्र न छोड़ते। इसके साथ मुख्यमंत्री ने कहा कि अब किसी भी राज्य को उत्तर प्रदेश के कामगार यू हीं खैरात में नहीं मिलेंगे। 

इसके लिए राज्यों को उत्तर प्रदेश सरकार से अनुमति लेनी होगी। योगी आदित्यनाथ मे माइग्रेशन कमीशन गठित करने का फैसला किया है। यह आयोग श्रमिकों को रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और पुनर्वास की सुविधा देने पर काम करेगा। सरकार श्रमिकों से फार्म भरवाकर उनकी कुशलता का खाका तैयार करा रही है।

श्रमिकों के बीमा की योजना है और उनसे मनरेगा, चीनी मिल, ईंट भट्ठा, एमएसएमई और रेडीमेड गारमेंट समेत अन्य क्षेत्रों में  काम लेने की योजना तैयार हो रही है। खुद मुख्यमंत्री प्रदेश में हर रोज गरीब प्रवासियों के लिए रोजगार देने का दावा कर रहे हैं।

संक्रमण को लेकर मुख्यमंत्री की छटपटाहट



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here