Unionb Law Minister Ravi Shankar Prasad Said Need For Effective Response To Pils – जनहित याचिकाओं पर प्रभावी प्रतिक्रिया की जरूरत: रविशंकर प्रसाद

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Updated Mon, 11 May 2020 03:30 AM IST

रविशंकर प्रसाद (फाइल फोटो)
– फोटो : PTI

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कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन जैसे मुश्किल दौर में दायर होने वाली अत्यधिक जनहित याचिकाओं पर प्रभावी प्रतिक्रिया की जरूरत है। यह बात केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने रविवार को विधि अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के मार्फत हुई बैठक के दौरान कहीं। 

विधि अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के मौके पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। मंत्री प्रसाद ने उनसे कहा कि आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत केंद्र और राज्यों की ओर से जारी दिशा-निर्देशों को लेकर फैसला लेने की प्रक्रिया पर भरोसा किया जाना चाहिए क्योंकि यह कई चरणों के विचार-विमर्श के बाद ही सामने आता है जिसमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और केंद्र एवं राज्य के शीर्ष नौकरशाह शामिल होते हैं।

कानून मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कानून मंत्री ने खासतौर पर रेखांकित किया कि इस चुनौतीपूर्ण समय में अत्यधिक जनहित याचिकाओं से बचने की जरूरत है। हालांकि, किसी को वाद दायर करने से रोका नहीं जा सकता है पर इस तरह के हस्तक्षेप में प्रभावी प्रतिक्रिया दी जानी चाहिए।

बैठक में सॉलिसिटर जनरल मेहता ने मामलों की प्रकृति और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की जानकारी दी जिसमें केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों और कदमों को बरकरार रखा गया है। मंत्रालय ने बयान में यह भी कहा कि महामारी की गंभीरता को देखते हुए वीडियो कांफ्रेंस के जरिये सुनवाई कुछ और समय के लिए जारी रहनी चाहिए। प्रसाद ने इस चुनौती को अवसर के तौर पर लेने और न्याय प्रदान करने के लिए डिजिटल प्रणाली को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन जैसे मुश्किल दौर में दायर होने वाली अत्यधिक जनहित याचिकाओं पर प्रभावी प्रतिक्रिया की जरूरत है। यह बात केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने रविवार को विधि अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के मार्फत हुई बैठक के दौरान कहीं। 

विधि अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के मौके पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। मंत्री प्रसाद ने उनसे कहा कि आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत केंद्र और राज्यों की ओर से जारी दिशा-निर्देशों को लेकर फैसला लेने की प्रक्रिया पर भरोसा किया जाना चाहिए क्योंकि यह कई चरणों के विचार-विमर्श के बाद ही सामने आता है जिसमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और केंद्र एवं राज्य के शीर्ष नौकरशाह शामिल होते हैं।

कानून मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कानून मंत्री ने खासतौर पर रेखांकित किया कि इस चुनौतीपूर्ण समय में अत्यधिक जनहित याचिकाओं से बचने की जरूरत है। हालांकि, किसी को वाद दायर करने से रोका नहीं जा सकता है पर इस तरह के हस्तक्षेप में प्रभावी प्रतिक्रिया दी जानी चाहिए।

बैठक में सॉलिसिटर जनरल मेहता ने मामलों की प्रकृति और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की जानकारी दी जिसमें केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों और कदमों को बरकरार रखा गया है। मंत्रालय ने बयान में यह भी कहा कि महामारी की गंभीरता को देखते हुए वीडियो कांफ्रेंस के जरिये सुनवाई कुछ और समय के लिए जारी रहनी चाहिए। प्रसाद ने इस चुनौती को अवसर के तौर पर लेने और न्याय प्रदान करने के लिए डिजिटल प्रणाली को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

Unionb Law Minister Ravi Shankar Prasad Said Need for effective response to PILs



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