Supreme Court Seeks Response From The Cbi On The Parole Petition Of Khokhar Convicted Of 1984 Sikh Riots – 1984 सिख दंगों के दोषी खोखर की पैरोल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से मांगा जवाब

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 30 Apr 2020 06:11 PM IST

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पूर्व कांग्रेस पार्षद बलवान खोखर की याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा। साल 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में खोखर आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। हालांकि, कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए याचिका में खोखर के लिए आठ सप्ताह के लिए अंतरिम जमानत या पैरोल देने की मांग की गई। 

खोखर और पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार 17 दिसंबर, 2018 को दिल्ली हाईकोर्ट की तरफ से दोषी ठहराए जाने के बाद इस मामले में तिहाड़ जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे हैं।

मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की बेंच ने खोखर के वकील की तरफ से पेश की गई याचिकाओं का संज्ञान लिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के सरकार को दिए सुझाव का हवाला देते हुए कहा गया है कि महामारी को रोकने के लिए जेलों में भीड़ कम करने की आवश्यकता है।

जजों की बेंच ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से याचिका पर सुनवाई की, फिर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से सीबीआई का प्रतिनिधित्व करते हुए जवाब दाखिल करने को कहा। इससे पहले खोखर को 15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने उनके पिता की मौत के बाद 4 सप्ताह की पैरोल दी थी।

वरिष्ठ वकील एच एस फूलका, जो दंगा पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे और जो अभी पंजाब में अपने पैतृक गांव में है, उन्होंने जमानत याचिका का विरोध किया।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पूर्व कांग्रेस पार्षद बलवान खोखर की याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा। साल 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में खोखर आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। हालांकि, कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए याचिका में खोखर के लिए आठ सप्ताह के लिए अंतरिम जमानत या पैरोल देने की मांग की गई। 

खोखर और पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार 17 दिसंबर, 2018 को दिल्ली हाईकोर्ट की तरफ से दोषी ठहराए जाने के बाद इस मामले में तिहाड़ जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की बेंच ने खोखर के वकील की तरफ से पेश की गई याचिकाओं का संज्ञान लिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के सरकार को दिए सुझाव का हवाला देते हुए कहा गया है कि महामारी को रोकने के लिए जेलों में भीड़ कम करने की आवश्यकता है।

जजों की बेंच ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से याचिका पर सुनवाई की, फिर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से सीबीआई का प्रतिनिधित्व करते हुए जवाब दाखिल करने को कहा। इससे पहले खोखर को 15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने उनके पिता की मौत के बाद 4 सप्ताह की पैरोल दी थी।

वरिष्ठ वकील एच एस फूलका, जो दंगा पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे और जो अभी पंजाब में अपने पैतृक गांव में है, उन्होंने जमानत याचिका का विरोध किया।



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