Supreme Court Seeks Centre’s View On Timely Disposal Of Mercy Petitions Filed By A Petitioner – दया याचिका की प्रक्रिया, नियम और दिशानिर्देश को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र से मांगा जवाब

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 28 May 2020 12:05 AM IST

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देशभर में सजायाफ्ता कैदी की दया याचिका को लेकर अक्सर विवाद होता रहता है। हाल ही में निर्भया के दोषियों की दया याचिका मामले में भी पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठे थे। अब दया याचिका की प्रक्रिया, नियम और दिशानिर्देश को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर हुई है।

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने दया याचिकाओं को समयबद्ध तरीके से निबटाने के लिए इसकी प्रक्रिया, नियम और दिशानिर्देश तैयार करने के बारे में दायर याचिका पर बुधवार को केंद्र से जवाब मांगा है। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिए सुनवाई के दौरान इस याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया और उसे चार सप्ताह के भीतर इस पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा कि इस याचिका में वह सिर्फ गृह मंत्रालय को एक समय सीमा के भीतर राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका पेश करने का निर्देश देने के बारे में विचार कर सकती है। यह याचिका शिव कुमार त्रिपाठी नामक व्यक्ति ने दायर की है और उसने सवाल किया है कि राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका का निबटारा करने के लिये क्या कोई समय सीमा है।

त्रिपाठी ने याचिका में दलील दी है कि दया याचिकाओं के निबटारे की समय सीमा के बारे में कोई दिशा निर्देश नहीं हैं। त्रिपाठी ने इस याचिका में दया याचिकाओं के निबटारे के लिए एक समय सीमा निर्धारित करने का केंद्र को निर्देश देने का अनुरोध किया है जिसके भीतर इसका फैसला किया जाना चाहिए। केंद्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस याचिका के बारे में निर्देश प्राप्त करने और इसका जवाब देने के लिए वक्त चाहिए।

पीठ ने कहा कि दया याचिका का प्रारूप महत्वपूर्ण नही है लेकिन उसे राष्ट्रपति के समक्ष पेश करने की समय सीमा महत्वपूर्ण है। 

याचिका में कहा गया है कि दया प्रदान करने की शक्ति एक असाधारण अधिकार है और संबंधित प्राधिकारी को बहुत ही सावधानी के साथ इसका इस्तेमाल करना चाहिए। याचिका के अनुसार अगस्त, 2008 में गृह मंत्रालय ने एक याचिका का जवाब देते समय केंद्रीय सूचना आयोग को बताया था कि दया याचिकाओं के बारे में कोई लिखित प्रक्रिया नहीं है।

देशभर में सजायाफ्ता कैदी की दया याचिका को लेकर अक्सर विवाद होता रहता है। हाल ही में निर्भया के दोषियों की दया याचिका मामले में भी पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठे थे। अब दया याचिका की प्रक्रिया, नियम और दिशानिर्देश को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर हुई है।

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने दया याचिकाओं को समयबद्ध तरीके से निबटाने के लिए इसकी प्रक्रिया, नियम और दिशानिर्देश तैयार करने के बारे में दायर याचिका पर बुधवार को केंद्र से जवाब मांगा है। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिए सुनवाई के दौरान इस याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया और उसे चार सप्ताह के भीतर इस पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा कि इस याचिका में वह सिर्फ गृह मंत्रालय को एक समय सीमा के भीतर राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका पेश करने का निर्देश देने के बारे में विचार कर सकती है। यह याचिका शिव कुमार त्रिपाठी नामक व्यक्ति ने दायर की है और उसने सवाल किया है कि राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका का निबटारा करने के लिये क्या कोई समय सीमा है।

त्रिपाठी ने याचिका में दलील दी है कि दया याचिकाओं के निबटारे की समय सीमा के बारे में कोई दिशा निर्देश नहीं हैं। त्रिपाठी ने इस याचिका में दया याचिकाओं के निबटारे के लिए एक समय सीमा निर्धारित करने का केंद्र को निर्देश देने का अनुरोध किया है जिसके भीतर इसका फैसला किया जाना चाहिए। केंद्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस याचिका के बारे में निर्देश प्राप्त करने और इसका जवाब देने के लिए वक्त चाहिए।

पीठ ने कहा कि दया याचिका का प्रारूप महत्वपूर्ण नही है लेकिन उसे राष्ट्रपति के समक्ष पेश करने की समय सीमा महत्वपूर्ण है। 

याचिका में कहा गया है कि दया प्रदान करने की शक्ति एक असाधारण अधिकार है और संबंधित प्राधिकारी को बहुत ही सावधानी के साथ इसका इस्तेमाल करना चाहिए। याचिका के अनुसार अगस्त, 2008 में गृह मंत्रालय ने एक याचिका का जवाब देते समय केंद्रीय सूचना आयोग को बताया था कि दया याचिकाओं के बारे में कोई लिखित प्रक्रिया नहीं है।



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