Opposition Said, If Pm Narendra Modi Fulfilled His First Promise, Today Migrant Workers Would Not Have This Condition – अगर पीएम नरेंद्र मोदी निभाते अपना पहला वादा, तो आज मजदूरों की ये हालत न होतीः विपक्ष

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अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 30 May 2020 07:36 PM IST

घरों को लौटते प्रवासी

घरों को लौटते प्रवासी
– फोटो : PTI (फाइल फोटो)

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सार

  • आप ने केंद्र पर दिल्ली की अनदेखी का लगाया आरोप,
  • कांग्रेस बोली- यूपी-बिहार के मजदूरों ने खोली पोल कि गरीबों के लिए केंद्र ने नहीं किया कोई काम

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल का एक वर्ष पूरा कर लिया है। भाजपा इस अवसर पर लगातार बता रही है कि उसकी सरकार ने देश के विकास के लिए अभूतपूर्व काम किया है और इसके लिए उसे हमेशा याद रखा जाएगा।

लेकिन विपक्षी दलों ने उस पर यह कहते हुए हमला किया है कि अगर नरेंद्र मोदी सरकार ने अपना वायदा निभाया होता, तो देश आज आर्थिक दुष्चक्र के जाल में न फंसता।

अगर केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियां सही होती, तो बड़ी-बड़ी कंपनियां और बैंक बंद होने के कगार पर न खड़े होते और इतनी भारी संख्या में लोग बेरोजगार न हो रहे होते।

आप ने केंद्र पर दिल्ली की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह ने मोदी सरकार के एक साल के कार्यकाल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर केंद्र के खाते में उपलब्धि के नाम पर कुछ जोड़ा जा सकता है तो वह ये कि इस सरकार ने देश और समाज को दो भागों में बांटने का काम किया है।

दिल्ली से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश हुई है।

उन्होंने कहा कि कोरोना से निबटने के नाम पर केंद्र सरकार ने पूरे देश में 17.5 हजार करोड़ के आर्थिक पैकेज से मदद की है, लेकिन दिल्ली में ही उसने सौतेला व्यवहार किया है।

दिल्ली को इस हिस्से में से कुछ भी नहीं मिला। कोरोना के मामले में दिल्ली देश में तीसरे स्थान पर है। इस लिहाज से चुनौतियों से निबटने के लिए केंद्र को इसे तीसरी सबसे बड़ी मदद देनी चाहिए थी।

लेकिन केंद्र सरकार ने उसकी एक रुपये की भी मदद नहीं की।

उद्योगपतियों के लिए काम किया, गरीबों के लिए नहीं

आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि मुंबई हो या दिल्ली, श्रमिकों को उनके घर तक पहुंचने के लिए इसी केंद्र सरकार ने कोई प्रबंध नहीं किया।

केंद्र का दावा है कि उसने अब तक 90 लाख लोगों को उसके घर पहुंचाया है। अगर इस काम में उसे 900 करोड़ की भी लागत आई है तो केंद्र को यही काम लॉकडाउन लागू करने से पहले लागू करना चाहिए था।

जिससे मजदूरों को पूरे परिवार के साथ पैदल न भटकना पड़ता, लोगों की जान नहीं जाती। उन्होंने कहा कि इस सरकार ने हवाई सफर करने वाले उद्योगपतियों के लिए काम किया है, हवाई चप्पल पहनने वाले गरीबों के लिए नहीं।

वायदा निभाया होता तो ये दुर्दशा न होती

कांग्रेस नेता नदीम जावेद ने कहा कि नरेंद्र मोदी को केंद्र में आए छह साल से ज्यादा का समय बीत चुका है।

उन्होंने 2014 में उत्तर प्रदेश और बिहार के युवाओं से वायदा किया था कि वे इन राज्यों में इतने उद्योग लगा देंगे कि उन्हें मजदूरी करने के लिए अपना घर छोड़कर मुंबई-गुजरात और कोलकाता नहीं जाना पड़ेगा।

लेकिन लॉकडाउन में जिस तरह गरीब मजदूरों को अपने घर पहुंचने के लिए सड़कों पर भटकना पड़ रहा है, लोगों की मौत हो रही है, वह यह साबित करने के लिए काफी है नरेंद्र मोदी सरकार ने अपना पहला ही वायदा नहीं निभाया है।

अगर प्रधानमंत्री ने अपना पहला वायदा निभाया होता तो आज सड़कों पर मजदूरों की ये दुर्दशा नहीं होती।

दिल्ली के लिए किया सबसे बेहतर काम

वहीं, दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता अशोक गोयल देवराहा ने कहा कि केंद्र सरकार ने पूरे देश के साथ-साथ दिल्ली के लिए बहुत काम किया है।

ईस्टर्न-वेस्टर्न पेरीफेरल बनाने से 50 हजार ट्रकों को दिल्ली में घुसने से रोकना संभव हुआ है। इससे दिल्ली की वायु गुणवत्ता सुधरी है।

इसी प्रकार मेरठ एक्सप्रेस वे, मथुरा रोड पर बन रहा अंडर पास, धौलाकुआं लूप बनाने से आवागमन के साथ-साथ पर्यावरण को भी सुधारने में मदद मिली है।

उन्होंने कहा कि जबकि केंद्र सरकार ने पूरे देश को आयुष्मान योजना और गरीबों को आवास देने की सुविधा दी है, दिल्ली सरकार ने उसकी योजनाओं को लागू न कर दिल्लीवासियों को उस लाभ से वंचित रख उनके साथ विश्वासघात किया है।

उन्होंने कहा कि केंद्र की योजनाओं से आने वाले समय में अर्थव्यवस्था सुधरेगी और देश का विकास होगा।

 



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