On China Issue, The Defense Minister Rajnath Singh Said That India’s Pride Will Not Decrease – चीन मुद्दे पर रक्षा मंत्री की ड्रैगन को दो टूक, कहा- नहीं घटने देंगे भारत का गौरव

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डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 31 May 2020 06:55 AM IST

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चीन और भारतीय सैनिकों में करीब एक महीने से लद्दाख में एलएसी पर तनावपूर्ण गतिरोध जारी है। इस तनाव के बीच शनिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि भारत का गौरव किसी भी स्थिति में कम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि लद्दाख स्टैंडऑफ को सैन्य और राजनयिक स्तरों पर द्विपक्षीय वार्ता के जरिये हल करने की कोशिश की जा रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने के प्रस्ताव पर रक्षा मंत्री ने कहा, “इस बारे में मेरी अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क टी. एस्पर से बात हुई है। फोन पर शुक्रवार को बातचीत के दौरान मैंने उन्हें बता दिया कि भारत और चीन के बीच समस्याओं को राजनयिक और सैन्य स्तर पर वार्ताओं के जरिये सुलझाने वाला तंत्र पहले से ही मौजूद है।” बता दें कि बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से प्रस्ताव दिए जाने के बाद बृहस्पतिवार को ही विदेश मंत्रालय ने इसे अपरोक्ष तरीके से ठुकरा दिया था। लेकिन इस मुद्दे पर भारतीय स्थिति स्पष्ट करने वाले राजनाथ सिंह पहले केंद्रीय मंत्री हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा, “मैं देश को ये भरोसा दिलाना चाहता हूं कि किसी भी स्थिति में देश के गौरव और सम्मान की रक्षा की जाएगी। हमारी पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते रखने की नीति स्पष्ट है। ये कोई नई बात नहीं है। हम लंबे समय से इसका पालन कर रहे हैं। चीन के साथ कई बार मसले हो जाते हैं। ये पहले भी होते रहे हैं।”
2017 के डोकलाम गतिरोध पर भी बोले

राजनाथ सिंह ने 2017 में चीन के साथ सिक्किम के डोकलाम में हुए 70 दिन लंबे गतिरोध पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हालात तब बेहद तनावपूर्ण दिख रहे थे, लेकिन हम पीछे नहीं हटे। आखिरकार हम उस स्थिति को हल करने में सफल रहे। उन्होंने कहा, “चीन ने कहा है कि वह पूर्वी लद्दाख में सीमा मुद्दे को राजनयिक वार्ता के जरिये हल करना चाहता है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर दोनों पक्षों के भिन्न विचारों के चलते अतिक्रमण हो जाता है। भारत यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता रहा है कि तनाव नहीं बढ़ना चाहिए।” 

चीन और भारतीय सैनिकों में करीब एक महीने से लद्दाख में एलएसी पर तनावपूर्ण गतिरोध जारी है। इस तनाव के बीच शनिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि भारत का गौरव किसी भी स्थिति में कम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि लद्दाख स्टैंडऑफ को सैन्य और राजनयिक स्तरों पर द्विपक्षीय वार्ता के जरिये हल करने की कोशिश की जा रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने के प्रस्ताव पर रक्षा मंत्री ने कहा, “इस बारे में मेरी अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क टी. एस्पर से बात हुई है। फोन पर शुक्रवार को बातचीत के दौरान मैंने उन्हें बता दिया कि भारत और चीन के बीच समस्याओं को राजनयिक और सैन्य स्तर पर वार्ताओं के जरिये सुलझाने वाला तंत्र पहले से ही मौजूद है।” बता दें कि बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से प्रस्ताव दिए जाने के बाद बृहस्पतिवार को ही विदेश मंत्रालय ने इसे अपरोक्ष तरीके से ठुकरा दिया था। लेकिन इस मुद्दे पर भारतीय स्थिति स्पष्ट करने वाले राजनाथ सिंह पहले केंद्रीय मंत्री हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा, “मैं देश को ये भरोसा दिलाना चाहता हूं कि किसी भी स्थिति में देश के गौरव और सम्मान की रक्षा की जाएगी। हमारी पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते रखने की नीति स्पष्ट है। ये कोई नई बात नहीं है। हम लंबे समय से इसका पालन कर रहे हैं। चीन के साथ कई बार मसले हो जाते हैं। ये पहले भी होते रहे हैं।”

2017 के डोकलाम गतिरोध पर भी बोले

राजनाथ सिंह ने 2017 में चीन के साथ सिक्किम के डोकलाम में हुए 70 दिन लंबे गतिरोध पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हालात तब बेहद तनावपूर्ण दिख रहे थे, लेकिन हम पीछे नहीं हटे। आखिरकार हम उस स्थिति को हल करने में सफल रहे। उन्होंने कहा, “चीन ने कहा है कि वह पूर्वी लद्दाख में सीमा मुद्दे को राजनयिक वार्ता के जरिये हल करना चाहता है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर दोनों पक्षों के भिन्न विचारों के चलते अतिक्रमण हो जाता है। भारत यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता रहा है कि तनाव नहीं बढ़ना चाहिए।” 



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