Odisha And Goa Government Relaxed Labour Laws Under The Factories Act Of 1948 After Up Madhya Pradesh Gujarat – तीन राज्यों के बाद ओडिशा और गोवा ने भी दी श्रम कानून में ढील, कर्नाटक सरकार कर रही विचार

0
29


ख़बर सुनें

उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्यप्रदेश के बाद अब गोवा और ओडिशा की सरकार ने भी 1948 के कारखानों अधिनियम के तहत श्रम कानूनों में ढील दी है। दोनों राज्यों ने शुक्रवार को सभी कारखानों में कार्य करने की पाली 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे करने की अनुमति दे दी है। सप्ताह में 72 घंटे के ओवरटाइम को मंजूरी दी गई है।

गोवा और ओडिशा सरकार ने कोरोना वायरस महामारी की वजह से तीन महीने तक श्रम कानूनों में ढील देने का एलान किया है। दोनों राज्यों ने कहा कि श्रमिकों को अतिरिक्त घंटों के लिए अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा। वहीं, कर्नाटक सरकार भी श्रम कानूनों में छूट देने के बारे में सोच रही है। 

हालांकि, कर्नाटक यूनियनों का कहना है कि अगर श्रम कानूनों में ढील दी जाती है तो वे सर्वोच्च न्यायालय में सरकार के निर्णय को चुनौती देंगे। राज्य सरकारें कोरोना वायरस की वजह से कम हुए उत्पादन को बढ़ाने के लिए यह फैसला ले रही हैं। उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और गुजरात में श्रम कानून पहले ही बदल चुके हैं। राज्य सरकारें इसे निवेश, नौकरी और अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए अच्छा फैसला बता रही हैं।

उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रम कानूनों से छूट देने का फैसला किया है। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि सरकार ने एक अध्यादेश को मंजूरी दी है, जिसमें कोरोना वायरस संक्रमण के बाद प्रभावित हुई अर्थव्यवस्था और निवेश को पुनर्जीवित करने के लिए उद्योगों को श्रम कानूनों से छूट का प्रावधान है। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्री परिषद की बैठक में ‘उत्तर प्रदेश चुनिंदा श्रम कानूनों से अस्थाई छूट का अध्यादेश 2020’ को मंजूरी दी गई, ताकि फैक्ट्रियों और उद्योगों को तीन श्रम कानूनों तथा एक अन्य कानून के प्रावधान को छोड़ बाकी सभी श्रम कानूनों से छूट दी जा सके। महिलाओं और बच्चों से जुड़े श्रम कानून के प्रावधान और कुछ अन्य श्रम कानून लागू रहेंगे।

मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश सरकार ने औद्योगिक विवाद अधिनियम और कारखाना अधिनियम सहित प्रमुख अधिनियमों में संशोधन किए हैं। साथ ही कंपनियों को कोविड-19 संकट से तेजी से उबरने में मदद करने के लिए कागजी कार्रवाई को कम किया है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विभिन्न कदमों की घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश में सभी कारखानों में कार्य करने की पाली 8 घंटे से बढ़कर 12 घंटे की होगी। सप्ताह में 72 घंटे के ओवरटाइम को मंजूरी दी गई है। कारखाना नियोजक उत्पादकता बढ़ाने के लिए सुविधानुसार शिफ्टों में परिवर्तन कर सकेंगे।

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की राह पर चलते हुए गुजरात ने भी श्रम कानूनों को आसान बनाने की घोषणा की। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा कि, कम से कम 1,200 दिनों के लिए काम करने वाली सभी नई परियोजनाओं या पिछले 1,200 दिनों से काम कर रहीं परियोजनाओं को श्रम कानूनों के सभी प्रावधानों से छूट दी जाएगी। हालांकि तीन प्रावधान लागू रहेंगे। 

राज्य सरकार ने वैश्विक कंपनियों के लिए 33,000 हेक्टेयर जमीन की भी पहचान की है, जो चीन से अपना कारोबार स्थानांतरित करना चाहती हैं। न्यूनतम मजदूरी के भुगतान से संबंधित कानूनों, सुरक्षा मानदंडों का पालन करना तथा औद्योगिक दुर्घटना के मामले में श्रमिकों को पर्याप्त मुआवजा देना जैसे कानूनों के अलावा कंपनियों पर श्रम कानून का कोई अन्य प्रावधान लागू नहीं होगा।

केंद्र ने किया सुधारों का समर्थन
केंद्र सरकार ने आर्थिक विकास को बढ़ाने के लिए संरचनात्मक श्रम सुधारों का समर्थन किया। राज्य सरकार द्वारा लाए गए व्यापक श्रम कानून में बदलाव और छूट का समर्थन किया। केंद्र सरकार और मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारों को विश्वास है कि सुधारवादी मानसिकता और श्रम अनुपालन अवकाश अधिक निवेश को आकर्षित करेंगे और इससे विकास सुनिश्चित होगा।

ट्रेड यूनियन कर रहे विरोध
हालांकि, मजदूर यूनियनों और कुछ अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि इस परिवर्तन से श्रम बाजार में अराजकता फैल सकती है और श्रमिकों की उत्पादकता को नुकसान हो सकता है। कानून में बदलाव से ट्रेड यूनियन इसलिए परेशान हैं, क्योंकि ऐसी स्थिति में उन्हें लेबर का शोषण होने का शक है। अभी नियम काफी सख्त हैं, लेकिन फिर भी कई कंपनियों में मजदूरों का शोषण होता है, जिससे मजदूर परेशान हैं। 

उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्यप्रदेश के बाद अब गोवा और ओडिशा की सरकार ने भी 1948 के कारखानों अधिनियम के तहत श्रम कानूनों में ढील दी है। दोनों राज्यों ने शुक्रवार को सभी कारखानों में कार्य करने की पाली 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे करने की अनुमति दे दी है। सप्ताह में 72 घंटे के ओवरटाइम को मंजूरी दी गई है।

गोवा और ओडिशा सरकार ने कोरोना वायरस महामारी की वजह से तीन महीने तक श्रम कानूनों में ढील देने का एलान किया है। दोनों राज्यों ने कहा कि श्रमिकों को अतिरिक्त घंटों के लिए अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा। वहीं, कर्नाटक सरकार भी श्रम कानूनों में छूट देने के बारे में सोच रही है। 

हालांकि, कर्नाटक यूनियनों का कहना है कि अगर श्रम कानूनों में ढील दी जाती है तो वे सर्वोच्च न्यायालय में सरकार के निर्णय को चुनौती देंगे। राज्य सरकारें कोरोना वायरस की वजह से कम हुए उत्पादन को बढ़ाने के लिए यह फैसला ले रही हैं। उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और गुजरात में श्रम कानून पहले ही बदल चुके हैं। राज्य सरकारें इसे निवेश, नौकरी और अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए अच्छा फैसला बता रही हैं।

उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रम कानूनों से छूट देने का फैसला किया है। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि सरकार ने एक अध्यादेश को मंजूरी दी है, जिसमें कोरोना वायरस संक्रमण के बाद प्रभावित हुई अर्थव्यवस्था और निवेश को पुनर्जीवित करने के लिए उद्योगों को श्रम कानूनों से छूट का प्रावधान है। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्री परिषद की बैठक में ‘उत्तर प्रदेश चुनिंदा श्रम कानूनों से अस्थाई छूट का अध्यादेश 2020’ को मंजूरी दी गई, ताकि फैक्ट्रियों और उद्योगों को तीन श्रम कानूनों तथा एक अन्य कानून के प्रावधान को छोड़ बाकी सभी श्रम कानूनों से छूट दी जा सके। महिलाओं और बच्चों से जुड़े श्रम कानून के प्रावधान और कुछ अन्य श्रम कानून लागू रहेंगे।

मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश सरकार ने औद्योगिक विवाद अधिनियम और कारखाना अधिनियम सहित प्रमुख अधिनियमों में संशोधन किए हैं। साथ ही कंपनियों को कोविड-19 संकट से तेजी से उबरने में मदद करने के लिए कागजी कार्रवाई को कम किया है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विभिन्न कदमों की घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश में सभी कारखानों में कार्य करने की पाली 8 घंटे से बढ़कर 12 घंटे की होगी। सप्ताह में 72 घंटे के ओवरटाइम को मंजूरी दी गई है। कारखाना नियोजक उत्पादकता बढ़ाने के लिए सुविधानुसार शिफ्टों में परिवर्तन कर सकेंगे।


आगे पढ़ें

गुजरात



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here