Judges Can Conduct Trial Through Video Conferencing From Court Room From Next Week – अगले हफ्ते से न्यायाधीश न्यायालय कक्ष से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कर सकते हैं सुनवाई: न्यायालय

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उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के रूप में मुकदमों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के लिए न्यायाधीश अगले सप्ताह से न्यायालय कक्ष में आ सकते हैं।

शीर्ष अदालत कोविड-19 महामारी के मद्देनजर देश में लॉकडाउन लागू होने के बाद से 25 मार्च से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई कर रहा है। न्यायालय ने अधिवक्ताओं और अपने स्टाफ के प्रॉक्सीमिटी कार्ड भी निलंबित कर रखे हैं।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना द्वारा एक मामले की सुनवाई के दौरान सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने जानना चाहा कि क्या न्यायाधीश शीर्ष अदालत के परिसर से ही न्यायिक कार्यवाही कर रहे हैं। इस पर पीठ ने कहा, ‘हां, यह पायलट परियोजना है और अगले सप्ताह से न्यायाधीश वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए न्यायालय कक्ष में आ सकते हैं।’ इस पर मेहता ने कहा, ‘उत्तम विचार है।’

लॉकडाउन के दौरान पीठ के सदस्य न्यायाधीशों के आवास पर एकत्र होते हैं और वकीलों को अपने घर या कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई मे शामिल होने की अनुमति होती है।

इससे पहले, उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को यह निर्णय लिया था कि 13 मई से उसके एकल न्यायाधीश की पीठ सात साल तक की सजा से संबंधित अपराधों के मामले में अंतरिम जमानत और जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। एकल न्यायाधीश की पीठ मुकदमों के स्थानांतरण के आवेदनों पर भी विचार करेगी।

शीर्ष अदालत में अभी दो या तीन न्यायाधीशों की पीठ मुकदमों की सुनवाई करती है। इसके बाद, पांच सदस्यीय या फिर इससे ज्यादा सदस्यों की संविधान पीठ संवैधानिक महत्व के मुद्दों की सुनवाई करती है।

सार

शीर्ष अदालत लॉकडाउन लागू होने के बाद से 25 मार्च से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई कर रहा है।

विस्तार

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के रूप में मुकदमों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के लिए न्यायाधीश अगले सप्ताह से न्यायालय कक्ष में आ सकते हैं।

शीर्ष अदालत कोविड-19 महामारी के मद्देनजर देश में लॉकडाउन लागू होने के बाद से 25 मार्च से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई कर रहा है। न्यायालय ने अधिवक्ताओं और अपने स्टाफ के प्रॉक्सीमिटी कार्ड भी निलंबित कर रखे हैं।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना द्वारा एक मामले की सुनवाई के दौरान सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने जानना चाहा कि क्या न्यायाधीश शीर्ष अदालत के परिसर से ही न्यायिक कार्यवाही कर रहे हैं। इस पर पीठ ने कहा, ‘हां, यह पायलट परियोजना है और अगले सप्ताह से न्यायाधीश वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए न्यायालय कक्ष में आ सकते हैं।’ इस पर मेहता ने कहा, ‘उत्तम विचार है।’

लॉकडाउन के दौरान पीठ के सदस्य न्यायाधीशों के आवास पर एकत्र होते हैं और वकीलों को अपने घर या कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई मे शामिल होने की अनुमति होती है।

इससे पहले, उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को यह निर्णय लिया था कि 13 मई से उसके एकल न्यायाधीश की पीठ सात साल तक की सजा से संबंधित अपराधों के मामले में अंतरिम जमानत और जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। एकल न्यायाधीश की पीठ मुकदमों के स्थानांतरण के आवेदनों पर भी विचार करेगी।

शीर्ष अदालत में अभी दो या तीन न्यायाधीशों की पीठ मुकदमों की सुनवाई करती है। इसके बाद, पांच सदस्यीय या फिर इससे ज्यादा सदस्यों की संविधान पीठ संवैधानिक महत्व के मुद्दों की सुनवाई करती है।

शीर्ष अदालत लॉकडाउन लागू होने के बाद से 25 मार्च से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई कर रहा है।



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