जिनके पास कार्ड नहीं है, उन्हें राशन देने पर विचार करना चाहिए, सुप्रीम कोर्ट का सरकारों को सुझाव

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सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को केंद्र, राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को कहा है कि जिनके पास कार्ड नहीं है, उन्हें राशन देने पर विचार करना चाहिए। सार्वजनिक वितरण प्रणाली की एकसमान व्यवस्था बनाए जाने पर भी गौर किया जाना चाहिए।

जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने वीसी से सुनवाई में दिए आदेश में कहा, चूंकि यह नीतिगत मामला है, इसलिए इस तरह की राहत देने के मामले को केंद्र, राज्य व केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों पर छोड़ा जाता है। इसी के साथ पीठ ने इस याचिका का निपटारा कर दिया। बता दें कि शीर्ष कोर्ट ने हाल ही में केंद्र से लॉकडाउन में अस्थायी तौर पर एक राष्ट्र एक राशन कार्ड योजना की संभावना पर भी विचार करने को कहा था। केंद्र की यह योजना जून में लॉन्च होनी है। 

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर रोक लगाने से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के लिए लैंड यूज बदली जाने वाली अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा, लॉकडाउन में कोई अभी कुछ करने नहीं जा रहा। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने राजीव सूरी द्वारा दायर इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। सूरी ने इस परियोजना पर 20 मार्च को जारी केंद्र की अधिसूचना को रद्द करने की गुहार लगाई थी। वीसी से सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा, मामले में कोई अर्जेंसी नहीं है। ब्यूरो

कोरोना के इलाज के तरीके में बदलाव का आदेश नहीं दे सकते

शीर्ष अदालत ने कोरोना के मरीजों के इलाज को लेकर दिशा-निर्देश में बदलाव का आदेश देने से इनकार कर दिया है। कोरोना के गंभीर मरीजों को दी जाने वाली मलेरियारोधी हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन व एंटीबायोटिक अजीथ्रोमाइसिन दवा को लेकर दिशा-निर्देश में बदलाव के निर्देश देने का आग्रह किया गया था। शीर्ष कोर्ट ने कहा, वह इस मामले का जानकार नहीं है, अत: कोई निर्देश नहीं दे सकता। तीन सदस्यीय पीठ ने याचिकाकर्ता एनजीओ ‘पीपल फॉर बेटर ट्रीटमेंट’ की याचिका को आईसीएमआर को एक ज्ञापन के तौर पर लेने को कहा है। सुनवाई के दौरान ओहियो स्थित एनजीओ के अध्यक्ष डॉ. कुणाल साहा ने कहा, इन दवाओं से इससे मौत भी हो रही है। ब्यूरो

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