भारत के पास कोरोना का तोड़ ट्रंप ने Hydroxychloroquine टैबलेट के लिए क्यों लगाई मोदी से गुहार?

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Trump seeks Modi's help to release Hydroxychloroquine ordered by US to treat COVID-19 patients
  • भारत पहले यह आकलन करेगा की भारत को इस दवा(Hydroxychloroquine) की कितनी आवश्यकता है उसके बाद वह दूसरे देशे को देनी की सोचेगा।
  • भारत ने 26 मार्च को Hydroxychloroquine (हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन) और संबंधित दवाइयों के एक्सपोर्ट(निर्यात) पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी थी ।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा (Hydroxychloroquine) हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वाइन गोलियों के लिए भारत से एक्सपोर्ट(निर्यात) पर प्रतिबंध हटाने के अनुरोध पर बात करी है जिसका उपयोग कोरोनावायरस रोगियों के इलाज के लिए किया जा सकता है।

इस दवा(Hydroxychloroquine) से परिचित लोगों जो इस पर काफी समय से काम कर रहे हैं उन्होंने बताया है की भारत अपनी घरेलू आवश्यकता का आकलन करने के बाद ही दूसरे देशो को इस दवा(Hydroxychloroquine) का एक्सपोर्ट(निर्यात) करने का विचार करेगा|

डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार(4.4.2020) देर रात कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने देश में (Hydroxychloroquine) हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वाइन की गोलियों की आपूर्ति करने का आग्रह किया है, अमेरिका में कोरोनोवायरस के मामले और उनसे होने वाली मौतों की कगार तेज़ी से बढ़ती जारही है।

क्यों अमेरिका को (Hydroxychloroquine) की जरूरत पड़ी ?

मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारी से लड़ने में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वाइन (Hydroxychloroquine) बेहद कारगर दवा है। भारत में हर साल बड़ी संख्या में लोग मलेरिया की चपेट में आते हैं, इसलिए भारतीय दवा कंपनियां बड़े स्तर पर इसका उत्पादन करती हैं। अब यह दवा कोरोना वायरस से लड़ने में कारगर सिद्ध हो रही है, तब इसकी मांग और बढ़ गई है। हालांकि, कच्चे माल की कमी ने इस दवा के उत्पादन को बहुत प्रभावित किया है। वैश्विक लॉकडाउन के कारण भारतीय दवा निर्माता कंपनियों ने सरकार से इस दवा के लिए कच्चे माल को एयरलिफ्ट कर मंगाने की मांग की है।

(Hydroxychloroquine) हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वाइन गोलियों को कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई के मोर्चे पर रोगनिरोधी के रूप में पहचाना जाता है – डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिक्स का मानना है की घातक वायरस से संक्रमित रोगियों के इलाज के लिए (Hydroxychloroquine) हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वाइन दवा इस्तेमाल किया जाता है |

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका के अनुरोध को कई तरीकों से एक अवसर के रूप में देखा जा सकता है। यह फार्मास्युटिकल क्षेत्र(दवा क्षेत्र) में भारत के योगदान और क्षमता की पहचान को दर्शाता है और यह भारत और अमेरिका को ड्रग्स और चिकित्सा उपकरणों की कीमतों में अंतर के लिए बातचीत करने के लिए एक मार्ग बनेगा जिससे की भारत भी उन सभी चिकित्सिक उपकरण्डो को भविष्य में अमेरिका से सस्ती दरों पर खरीद सके

पीएम मोदी के साथ बातचीत के बाद यह बोले ट्रंप

शनिवार देर रात अपने व्हाइट हाउस के कोरोनावायरस फोर्स ब्रीफिंग में, ट्रम्प ने कहा कि वह (Hydroxychloroquine) हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की आपूर्ति के लिए भारत से बात कर रहे थे। उसी दिन कोरोनावायरस के कारण अमेरिका में सबसे अधिक यानी की 1,300 मौतें दर्ज की थी।

समाचार एजेंसी ANI(एएनआई) के अनुसार, ट्रम्प ने कहा की “भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आज (शनिवार) को बात करने के बाद, भारत की अमेरिका से बात करने के बाद हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा पर रोक हटाने के लिए के लिए गंभीरता से विचार कर रहा है ताकी अमेरिका इस दवा को भारत से ले सके।”

डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा की “भारत इस दवा को काफी अछि तादात पर बनाया है। हलाकि उन्हें अपने बिलियन-प्लस लोगों के लिए भी बहुत कुछ चाहिए। मलेरिया-रोधी दवा, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को उपचार के लिए स्ट्रेटेजिक नेशनल स्टॉकपाइल के माध्यम से जारी किया जाएगा।

“में भारत का शुक्र गुजार रहूँगा यदि वे हमारे द्वारा आदेशित मात्रा को जारी करेंगे,” ट्रम्प ने कहा ।

अपनी टिप्पणी में, ट्रम्प ने यह भी कहा कि वे डॉक्टरों के आदेश पर वह भी हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन ले सकते हैं।

PM नरेंद्र मोदी ने टवीट कर कहा “अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ टेलीफोन पर बातचीत हुई,हमने एक अच्छी चर्चा की, और कोरोनावायरस से लड़ने के लिए भारत-अमेरिका साझेदारी की पूरी ताकत को तैनात करने पर सहमति व्यक्त की।”

PM नरेंद्र मोदी ने टवीट कर कहा

अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यह भी चेतावनी दी कि अगले दो सप्ताह “बहुत, बहुत घातक” होने वाले थे। “” दुर्भाग्य से, लेकिन हम लेकिन हम इसे जल्द ही लड़ लेंगे हैं ताकि हम यथासंभव कम जानो को खो दें और मुझे लगता है कि हम सफल होने जा रहे हैं, “

भारत ने 26 मार्च को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वाइन से बने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वाइन के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी, हालांकि भारतीय वाणिज्य मंत्रालय ने कहा था कि निर्यात को विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) से अनुमति दी जाएगी और सरकार द्वारा मानवीय प्रयासों के लिए या पूर्व प्रयासों को पूरा किया जाएगा।

मानसिंह ने कहा कि इससे भारत और अमेरिका को ड्रग्स और चिकित्सा उपकरणों की कीमतों के काम लेना से संबंधित मुद्दों को हल करने का अवसर मिल सकता है, जैसे स्टेंट(स्टेंट एक छोटी ट्यूब हॉट है जिसे डॉक्टर इतेमाल करते है कोई ब्लॉकेज को खोलने के लिए ) उसी प्रकार हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वाइन यह काम करेगा अमेरिका की मदद करने क लिए एवं जो दोनों देशों के बीच व्यापार विवादों में प्रमुखता से लगा है।

आपका क्या कहना है इस विषय पर कमेंट जरूर करे क्या भारत को ये दवा अमेरिका को देनी चाइये |

4 COMMENTS

  1. Great content sir.
    Iss crisis k time m hm kiss tarah apne time ko apne growth k liye use kr skte h uske baare m kuch btaiye

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