Do Not Mistake The Violation Of Unlock 1, You Can Get Penalty For Not Following The Guidelines – अनलॉक 1 के उल्लंघन की गलती न करें, दिशा निर्देशों का पालन न करने पर मिल सकता है दंड

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एक जून से अनलॉक-1 शुरू हो रहा है। इसमें लॉकडाउन 4.0 के मुकाबले कई तरह की अतिरिक्त छूट दी गई हैं। हो सकता है कि लोग काफी राहत महसूस करें। इस अनलॉक-1 की खास बात यह है कि उल्लंघन या लापरवाही यहां भी बर्दाश्त नहीं होगी।

खासतौर पर, सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए दंड का प्रावधान जारी रहेगा। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 से लेकर 60 तक जो प्रावधान हैं, उनके तहत उल्लंघनकर्ताओं को सजा मिल सकती है।
 

केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से जारी नई गाइडलाइंस के अनुसार, सरकारी अधिकारी, कर्मचारी, उद्योग, कामगार और आम जनता को अनलॉक-1 के लिए जारी तमाम दिशा निर्देशों का पालन करना होगा।

अनलॉक 1 के दिशा निर्देशों का उल्लंघन करने पर जेल की सजा और आर्थिक दंड, दोनों का प्रावधान है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को यह दिशा निर्देश दिए हैं कि वे अनलॉक 1 के सभी प्रावधानों का सख्ती से पालन कराएं।

अगर कोई भी व्यक्ति या सरकारी अधिकारी इनका उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
 

अनलॉक 1 के दौरान कोई व्यक्ति बिना किसी ठोस कारण के सरकारी कार्यों या ड्यूटी में बाधा पहुंचाता है तो उसे एक साल की सजा हो सकती है।

केंद्र सरकार और राज्य सरकार के किसी अधिकारी या कर्मचारी अथवा राष्ट्रीय प्राधिकरण, राज्य प्राधिकरण व जिला प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत कोई व्यक्ति जो अनलॉक 1 के दिशा निर्देशों का पालन कराने के लिए नियुक्त किया गया है, उसके कार्य निर्वहन में कोई बाधा पहुंचाता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।

किसी निर्देश का पालन करने से कोई अधिकारी या कर्मचारी इंकार करता है, तो उसे दोषी साबित होने पर एक वर्ष तक का कारावास और जुर्माना, दोनों की सजा हो सकती है।

यदि उस व्यक्ति ने कार्य में बाधा डालने या निर्देशों का पालन नहीं करने से किसी के जीवन की हानि होती है या उनके लिए आसन्न खतरा पैदा होता है, तो ऐसे मामले में दो वर्ष की कैद होगी।

झूठा दावा करना महंगा पड़ेगा

यदि कोई अधिकारी या सामान्यजन सोची-समझी रणनीति के तहत आपदा के परिणामस्वरूप कोई राहत, सहायता, मरम्मत, दोबारा निर्माण या अन्य फायदे प्राप्त करने के लिए झूठा दावा पेश करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

हालांकि ऐसे मामले में संबंधित आरोपी के खिलाफ यह बात साबित करनी होगी कि उसने यह जानते हुए उक्त गलती की है कि उसने झूठा दावा किया है।

दोषसिद्धि पर उसे दो वर्ष तक की सजा दी जा सकती है। इसमें जुर्माने का भी प्रावधान है। अगर धन या सामग्री को लेकर दुरुपयोग होता है तो जिम्मेदारी व्यक्ति को दो वर्ष तक की सजा मिलेगी।

कोई अधिकारी बिना किसी ठोस रिपोर्ट के झूठी चेतावनी जारी करता है तो उस स्थिति में भी एक वर्ष तक की सजा दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

सार

अनलॉक 1 के दिशा निर्देशों का उल्लंघन करने पर जेल की सजा और आर्थिक दंड, दोनों का प्रावधान है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को यह दिशा निर्देश दिए हैं कि वे अनलॉक 1 के सभी प्रावधानों का सख्ती से पालन कराएं…

विस्तार

एक जून से अनलॉक-1 शुरू हो रहा है। इसमें लॉकडाउन 4.0 के मुकाबले कई तरह की अतिरिक्त छूट दी गई हैं। हो सकता है कि लोग काफी राहत महसूस करें। इस अनलॉक-1 की खास बात यह है कि उल्लंघन या लापरवाही यहां भी बर्दाश्त नहीं होगी।

खासतौर पर, सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए दंड का प्रावधान जारी रहेगा। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 से लेकर 60 तक जो प्रावधान हैं, उनके तहत उल्लंघनकर्ताओं को सजा मिल सकती है।

 

केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से जारी नई गाइडलाइंस के अनुसार, सरकारी अधिकारी, कर्मचारी, उद्योग, कामगार और आम जनता को अनलॉक-1 के लिए जारी तमाम दिशा निर्देशों का पालन करना होगा।

अनलॉक 1 के दिशा निर्देशों का उल्लंघन करने पर जेल की सजा और आर्थिक दंड, दोनों का प्रावधान है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को यह दिशा निर्देश दिए हैं कि वे अनलॉक 1 के सभी प्रावधानों का सख्ती से पालन कराएं।

अगर कोई भी व्यक्ति या सरकारी अधिकारी इनका उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
 

अनलॉक 1 के दौरान कोई व्यक्ति बिना किसी ठोस कारण के सरकारी कार्यों या ड्यूटी में बाधा पहुंचाता है तो उसे एक साल की सजा हो सकती है।

केंद्र सरकार और राज्य सरकार के किसी अधिकारी या कर्मचारी अथवा राष्ट्रीय प्राधिकरण, राज्य प्राधिकरण व जिला प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत कोई व्यक्ति जो अनलॉक 1 के दिशा निर्देशों का पालन कराने के लिए नियुक्त किया गया है, उसके कार्य निर्वहन में कोई बाधा पहुंचाता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।

किसी निर्देश का पालन करने से कोई अधिकारी या कर्मचारी इंकार करता है, तो उसे दोषी साबित होने पर एक वर्ष तक का कारावास और जुर्माना, दोनों की सजा हो सकती है।

यदि उस व्यक्ति ने कार्य में बाधा डालने या निर्देशों का पालन नहीं करने से किसी के जीवन की हानि होती है या उनके लिए आसन्न खतरा पैदा होता है, तो ऐसे मामले में दो वर्ष की कैद होगी।

झूठा दावा करना महंगा पड़ेगा

यदि कोई अधिकारी या सामान्यजन सोची-समझी रणनीति के तहत आपदा के परिणामस्वरूप कोई राहत, सहायता, मरम्मत, दोबारा निर्माण या अन्य फायदे प्राप्त करने के लिए झूठा दावा पेश करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

हालांकि ऐसे मामले में संबंधित आरोपी के खिलाफ यह बात साबित करनी होगी कि उसने यह जानते हुए उक्त गलती की है कि उसने झूठा दावा किया है।

दोषसिद्धि पर उसे दो वर्ष तक की सजा दी जा सकती है। इसमें जुर्माने का भी प्रावधान है। अगर धन या सामग्री को लेकर दुरुपयोग होता है तो जिम्मेदारी व्यक्ति को दो वर्ष तक की सजा मिलेगी।

कोई अधिकारी बिना किसी ठोस रिपोर्ट के झूठी चेतावनी जारी करता है तो उस स्थिति में भी एक वर्ष तक की सजा दिए जाने का प्रावधान किया गया है।



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