Csir Nal Makes 36 Days Non Invasive Ventilator Swasth Vayu For Corona Patients – कोरोना मरीजों के लिए Csir-nal ने 36 दिन में बनाया नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर ‘स्वस्थ वायु’

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Updated Wed, 13 May 2020 05:25 AM IST

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वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरी (एनएएल) ने कोरोना मरीजों के इलाज के लिए एक नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर बीपैप (बीआईपीएपी) बनाया है। वेंटिलेटर को रिकॉर्ड 36 दिनों के भीतर तैयार कर लिया गया है। इसे ‘स्वास्थ्य वायु’ नाम दिया गया है।

सीएसआईआर-एनएएल के निदेशक जेजे जाधव ने बताया कि टीम ने एयरोस्पेस डिजाइन डोमेन में अपनी विशेषज्ञता के आधार पर स्पिन-ऑफ तकनीक को सक्षम किया है। एनएएल हेल्थ सेंटर में इस प्रणाली के कड़े बायोमेडिकल परीक्षण और बीटा क्लिनिकल परीक्षण हुए हैं।

वैश्विक अनुभव के आधार पर और भारत व विदेश में मौजूद विशेषज्ञों से परामर्श के बाद इसे तैयार किया गया है। यह बाहरी ऑक्सीजन कंसंटेटर से जुड़ा होता है। यह मध्यम या मध्यम स्तर के गंभीर कोरोना मरीजों का इलाज करने में सक्षम होगा। इन्हें इनवेसिव वेंटिलेशन की आवश्यकता नहीं होती है।

इस मशीन का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसके इस्तेमाल के लिए किसी स्पेशल नर्सिंग की आवश्यकता नहीं है। ये किसी वार्ड, अस्थायी अस्पताल या डिस्पेंसरी में भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है। नर्सिंग स्टाफ को इसके लिए प्रशिक्षित करने की जरूरत नहीं है।

इसे स्वदेशी उपकरण और तकनीक से तैयार किया गया है। इसे एनएबीएल की मान्यता प्राप्त एजेंसियों ने प्रमाणित किया है। जल्द ही नियामक अधिकारियों से मंजूरी मिलने के बाद अस्पतालों में नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर का इस्तेमाल शुरू हो जाएगा। 

सार

  • वेंटिलेटर को रिकॉर्ड 36 दिनों के भीतर तैयार कर लिया गया है
  • इस वेंटिलेटर को ‘स्वास्थ्य वायु’ नाम दिया गया है
  • इसके इस्तेमाल के लिए किसी स्पेशल नर्सिंग की आवश्यकता नहीं है

विस्तार

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरी (एनएएल) ने कोरोना मरीजों के इलाज के लिए एक नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर बीपैप (बीआईपीएपी) बनाया है। वेंटिलेटर को रिकॉर्ड 36 दिनों के भीतर तैयार कर लिया गया है। इसे ‘स्वास्थ्य वायु’ नाम दिया गया है।

सीएसआईआर-एनएएल के निदेशक जेजे जाधव ने बताया कि टीम ने एयरोस्पेस डिजाइन डोमेन में अपनी विशेषज्ञता के आधार पर स्पिन-ऑफ तकनीक को सक्षम किया है। एनएएल हेल्थ सेंटर में इस प्रणाली के कड़े बायोमेडिकल परीक्षण और बीटा क्लिनिकल परीक्षण हुए हैं।

वैश्विक अनुभव के आधार पर और भारत व विदेश में मौजूद विशेषज्ञों से परामर्श के बाद इसे तैयार किया गया है। यह बाहरी ऑक्सीजन कंसंटेटर से जुड़ा होता है। यह मध्यम या मध्यम स्तर के गंभीर कोरोना मरीजों का इलाज करने में सक्षम होगा। इन्हें इनवेसिव वेंटिलेशन की आवश्यकता नहीं होती है।

इस मशीन का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसके इस्तेमाल के लिए किसी स्पेशल नर्सिंग की आवश्यकता नहीं है। ये किसी वार्ड, अस्थायी अस्पताल या डिस्पेंसरी में भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है। नर्सिंग स्टाफ को इसके लिए प्रशिक्षित करने की जरूरत नहीं है।

इसे स्वदेशी उपकरण और तकनीक से तैयार किया गया है। इसे एनएबीएल की मान्यता प्राप्त एजेंसियों ने प्रमाणित किया है। जल्द ही नियामक अधिकारियों से मंजूरी मिलने के बाद अस्पतालों में नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर का इस्तेमाल शुरू हो जाएगा। 



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