Covid-19 Lockdown Ravi Shankar Prasad News Work From Home For It Companies Will Be Extended Till July 31 Amid Coronavirus Scare – Coronavirus: केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद बोले- आईटी कंपनियों के लिए वर्क फ्रॉम होम 31 जुलाई तक बढ़ेगा

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 28 Apr 2020 10:01 PM IST

केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद (फाइल फोटो)

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केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने मंगलवार को राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रियों से कहा कि निवेश को बढ़ावा देने वाली पहलों के जरिए इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में भारत के सामने अपार संभावनाएं हैं और राज्यों को इसका फायदा उठाना चाहिए।

कोरोना वायरस महामारी को लेकर प्रसाद ने राज्यों के आईटी मंत्रियों के साथ वीडियो-कांंफ्रेंस के माध्यम से बातचीत के दौरान यह बात कही। इस बातचीत के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि घर से काम करने की सुविधा के लिए कनेक्टिविटी के नियमों में ढील दी गई है। ये छूट 30 अप्रैल को खत्म होने वाली थी, जिसे अब 31 जुलाई तक बढ़ा दिया गया है।
 
प्रसाद ने कहा कि राज्यों ने आरोग्य सेतु एप की अत्यधिक सराहना की और उन्होंने भरोसा दिया कि फीचर फोन के लिए इसी तरह के समाधान का विकास होगा और उसे जल्द लॉन्च किया जाएगा। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री ने कहा कि उनका मंत्रालय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार फेक न्यूज की निगरानी कर रहा है और उनसे सख्ती से निपटा जा रहा है।

चीन से कारोबार समेट रहीं विदेशी कंपनियों को भारत में लाने की तैयारी
चीन से निकलने को तैयार खासकर जापान और अमेरिका की कंपनियों को सरकार हर हाल में भारत में लाने की कोशिश में जुट गई है। इस काम में आगे आने के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकारों को तैयार कर रही है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने भी राज्यों के आइटी मंत्रियों से कहा कि अभी जो चीन के हालात हैं, उसका फायदा भारत को मिलने जा रहा है। ऐसे में  हमें तैयार रहना होगा।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 के बाद कई कंपनियां चीन से बाहर निकलना चाहती हैं। चीन में काम कर रही विदेशी कंपनियों को अपने यहां लाने के लिए उत्तर प्रदेश और गुजरात सरकार पहले से ही तैयारी में जुटी हुई है।

मुख्यमंत्रियों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कोरोना के दौर में भारत मैन्यूफैक्चरिंग में चीन का विकल्प बन सकता है। राज्य अगर अपने यहां पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर का इंतजाम कर लें, तो चीन में काम कर रही विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए लाया जा सकता है।

केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने मंगलवार को राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रियों से कहा कि निवेश को बढ़ावा देने वाली पहलों के जरिए इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में भारत के सामने अपार संभावनाएं हैं और राज्यों को इसका फायदा उठाना चाहिए।

कोरोना वायरस महामारी को लेकर प्रसाद ने राज्यों के आईटी मंत्रियों के साथ वीडियो-कांंफ्रेंस के माध्यम से बातचीत के दौरान यह बात कही। इस बातचीत के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि घर से काम करने की सुविधा के लिए कनेक्टिविटी के नियमों में ढील दी गई है। ये छूट 30 अप्रैल को खत्म होने वाली थी, जिसे अब 31 जुलाई तक बढ़ा दिया गया है।
 

प्रसाद ने कहा कि राज्यों ने आरोग्य सेतु एप की अत्यधिक सराहना की और उन्होंने भरोसा दिया कि फीचर फोन के लिए इसी तरह के समाधान का विकास होगा और उसे जल्द लॉन्च किया जाएगा। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री ने कहा कि उनका मंत्रालय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार फेक न्यूज की निगरानी कर रहा है और उनसे सख्ती से निपटा जा रहा है।

चीन से कारोबार समेट रहीं विदेशी कंपनियों को भारत में लाने की तैयारी
चीन से निकलने को तैयार खासकर जापान और अमेरिका की कंपनियों को सरकार हर हाल में भारत में लाने की कोशिश में जुट गई है। इस काम में आगे आने के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकारों को तैयार कर रही है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने भी राज्यों के आइटी मंत्रियों से कहा कि अभी जो चीन के हालात हैं, उसका फायदा भारत को मिलने जा रहा है। ऐसे में  हमें तैयार रहना होगा।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 के बाद कई कंपनियां चीन से बाहर निकलना चाहती हैं। चीन में काम कर रही विदेशी कंपनियों को अपने यहां लाने के लिए उत्तर प्रदेश और गुजरात सरकार पहले से ही तैयारी में जुटी हुई है।

मुख्यमंत्रियों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कोरोना के दौर में भारत मैन्यूफैक्चरिंग में चीन का विकल्प बन सकता है। राज्य अगर अपने यहां पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर का इंतजाम कर लें, तो चीन में काम कर रही विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए लाया जा सकता है।





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