Centre Government Backs Big Labour Reforms In Up And Mp To Attract Investments In This Lockdown Period – केंद्र ने उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश द्वारा किए गए श्रम सुधारों का किया समर्थन, निवेश बढ़ने की संभावना

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 09 May 2020 09:13 AM IST

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केंद्र सरकार ने शुक्रवार को आर्थिक विकास को बढ़ाने के लिए संरचनात्मक श्रम सुधारों का समर्थन किया। साथ ही सरकार ने उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश द्वारा लाए गए व्यापक श्रम कानून में बदलाव और छूट का समर्थन किया। 

केंद्र सरकार और इन दोनों राज्यों की भाजपा सरकारों को विश्वास है कि सुधारवादी मानसिकता और श्रम अनुपालन अवकाश अधिक निवेश को आकर्षित करेंगे और इससे विकास सुनिश्चित होगा। हालांकि, मजदूर यूनियनों और कुछ अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि इस परिवर्तन से श्रम बाजार में अराजकता फैल सकती है और श्रमिकों की उत्पादकता को नुकसान हो सकता है।

नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अमिताभ कांत ने ट्वीट किया कि संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से आगे बढ़ने के लिए सुधारवादी उत्साह निरंतर विकास सुनिश्चित करेगा। यूपी और एमपी बड़े सुधारकों के रूप में उभर रहे हैं।
 
यह बयान यूपी सरकार द्वारा अध्यादेश लाए जाने के एक दिन बाद आया है जिसमें व्यवसायों को तीन साल तक सभी प्रमुख श्रम कानूनों का पालन करने से छूट दी गई है। प्रमुख श्रम कानूनों में केवल तीन कानून ऐसे से जिनसे छूट नहीं दी गई है। 

मध्यप्रदेश सरकार ने औद्योगिक विवाद अधिनियम और कारखाना अधिनियम सहित प्रमुख अधिनियमों में संशोधन किए हैं। साथ ही कंपनियों को कोविड-19 संकट से तेजी से उबरने में मदद करने के लिए कागजी कार्रवाई को कम किया है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि इस महामारी से आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित है, इस कारण मजदूरों का कल्याण भी प्रभावित हुआ है। आर्थिक गतिविधि को फिर से पटरी पर लाने के लिए नए औद्योगिक अवसरों को लाना होगा और पुराने औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की जरूरत है। 

इसने कहा कि औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और निवेश को बढ़ावा देने के लिए व्यवसायों को श्रम कानूनों से अस्थायी रूप से राहत प्रदान करना आवश्यक हो गया है।

भारतीय उद्योग परिसंघ के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि श्रम कानून में बदलाव ऐसे कदम हैं जो उद्योग को अपनी श्रम क्रियाओं में भारी लचीलापन देंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे विघटनकारी समय पर आकर, जब आजीविका दबाव में आ गई है और लोगों की भीड़ को अपने कार्य स्थानों से दूर जाना पड़ा है। ये नीतिगत हस्तक्षेप आर्थिक गतिविधियों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आएंगे।

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को आर्थिक विकास को बढ़ाने के लिए संरचनात्मक श्रम सुधारों का समर्थन किया। साथ ही सरकार ने उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश द्वारा लाए गए व्यापक श्रम कानून में बदलाव और छूट का समर्थन किया। 

केंद्र सरकार और इन दोनों राज्यों की भाजपा सरकारों को विश्वास है कि सुधारवादी मानसिकता और श्रम अनुपालन अवकाश अधिक निवेश को आकर्षित करेंगे और इससे विकास सुनिश्चित होगा। हालांकि, मजदूर यूनियनों और कुछ अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि इस परिवर्तन से श्रम बाजार में अराजकता फैल सकती है और श्रमिकों की उत्पादकता को नुकसान हो सकता है।

नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अमिताभ कांत ने ट्वीट किया कि संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से आगे बढ़ने के लिए सुधारवादी उत्साह निरंतर विकास सुनिश्चित करेगा। यूपी और एमपी बड़े सुधारकों के रूप में उभर रहे हैं।
 
यह बयान यूपी सरकार द्वारा अध्यादेश लाए जाने के एक दिन बाद आया है जिसमें व्यवसायों को तीन साल तक सभी प्रमुख श्रम कानूनों का पालन करने से छूट दी गई है। प्रमुख श्रम कानूनों में केवल तीन कानून ऐसे से जिनसे छूट नहीं दी गई है। 

मध्यप्रदेश सरकार ने औद्योगिक विवाद अधिनियम और कारखाना अधिनियम सहित प्रमुख अधिनियमों में संशोधन किए हैं। साथ ही कंपनियों को कोविड-19 संकट से तेजी से उबरने में मदद करने के लिए कागजी कार्रवाई को कम किया है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि इस महामारी से आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित है, इस कारण मजदूरों का कल्याण भी प्रभावित हुआ है। आर्थिक गतिविधि को फिर से पटरी पर लाने के लिए नए औद्योगिक अवसरों को लाना होगा और पुराने औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की जरूरत है। 

इसने कहा कि औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और निवेश को बढ़ावा देने के लिए व्यवसायों को श्रम कानूनों से अस्थायी रूप से राहत प्रदान करना आवश्यक हो गया है।

भारतीय उद्योग परिसंघ के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि श्रम कानून में बदलाव ऐसे कदम हैं जो उद्योग को अपनी श्रम क्रियाओं में भारी लचीलापन देंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे विघटनकारी समय पर आकर, जब आजीविका दबाव में आ गई है और लोगों की भीड़ को अपने कार्य स्थानों से दूर जाना पड़ा है। ये नीतिगत हस्तक्षेप आर्थिक गतिविधियों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आएंगे।



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