Celebration Will Be Continue At Rani Ka Bagh Again With Some Restrictions Of Supreme Court – जयपुरः सुप्रीम कोर्ट के कुछ पाबंदियों के साथ ‘सिसोदिया रानी का बाग’ में फिर लौटेगी रौनक

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राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 12 May 2020 03:28 AM IST

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जयपुर के मशहूर ‘सिसोदिया रानी का बाग’ में फिर से रौनक लौटेगी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस ऐतिहासिक स्थल पर कुछ पाबंदियों के साथ समारोह के आयोजन और पर्यटकों की आवाजाही की अनुमति दे दी। इससे पहले एनजीटी ने वहां सभी तरह की गतिविधियों पर रोक लगा दी थी

जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एस रविंद्र भट्ट की पीठ ने एनजीटी के आदेश में बदलाव करते हुए उस जगह पर सुबह आठ से रात आठ बजे तक पर्यटकों की आवाजाही के अलावा उचित समारोह करने की इजाजत दी है। पीठ ने माना कि वह जगह पर्यटकों का पसंदीदा स्थल है और यहां बड़ी संख्या में लोग आते हैं, जिससे सरकार को राजस्व प्राप्त होता है।

पीठ ने पुरातत्व विभाग की उस दलील को स्वीकार किया कि इस ऐतिहासिक स्थल पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने से इस जगह का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि निर्धारित समय के बाद वहां किसी तरह की गतिविधि नहीं होगी। पीठ ने कहा कि वहां लेजर लाइट, तेज आवाज में संगीत और पटाखे चलाने पर पूरी तरह पाबंदी होगी।

पीठ ने पूरे इलाके का उचित रखरखाव करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष राजस्थान सरकार को उस स्थल के सौंदर्यीकरण को लेकर एक योजना बनाने को कहा था। जिसके बाद इसके सौंदर्यीकरण के लिए सरकार ने कंसलटेंट नियुक्त करने का निर्णय लिया। इस पर पीठ ने कंसलटेंट नियुक्त करने का निर्देश दिया।
 

सवाई जयसिंह ने 1728 में बनाया था

जयपुर-आगरा हाईवे पर स्थित इस स्मारक को महाराजा सवाई जयसिंह ने 1728 में बनाया था। यह स्मारक मुगल और भारतीय कला का बेहतरीन नमूना है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि एनजीटी द्वारा वहां पर पूरी तरह पाबंदी लगाना सही नहीं है। कोर्ट ने कहा कि पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए वहां उचित समारोह किया जा सकता है।

जयपुर के मशहूर ‘सिसोदिया रानी का बाग’ में फिर से रौनक लौटेगी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस ऐतिहासिक स्थल पर कुछ पाबंदियों के साथ समारोह के आयोजन और पर्यटकों की आवाजाही की अनुमति दे दी। इससे पहले एनजीटी ने वहां सभी तरह की गतिविधियों पर रोक लगा दी थी

जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एस रविंद्र भट्ट की पीठ ने एनजीटी के आदेश में बदलाव करते हुए उस जगह पर सुबह आठ से रात आठ बजे तक पर्यटकों की आवाजाही के अलावा उचित समारोह करने की इजाजत दी है। पीठ ने माना कि वह जगह पर्यटकों का पसंदीदा स्थल है और यहां बड़ी संख्या में लोग आते हैं, जिससे सरकार को राजस्व प्राप्त होता है।

पीठ ने पुरातत्व विभाग की उस दलील को स्वीकार किया कि इस ऐतिहासिक स्थल पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने से इस जगह का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि निर्धारित समय के बाद वहां किसी तरह की गतिविधि नहीं होगी। पीठ ने कहा कि वहां लेजर लाइट, तेज आवाज में संगीत और पटाखे चलाने पर पूरी तरह पाबंदी होगी।

पीठ ने पूरे इलाके का उचित रखरखाव करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष राजस्थान सरकार को उस स्थल के सौंदर्यीकरण को लेकर एक योजना बनाने को कहा था। जिसके बाद इसके सौंदर्यीकरण के लिए सरकार ने कंसलटेंट नियुक्त करने का निर्णय लिया। इस पर पीठ ने कंसलटेंट नियुक्त करने का निर्देश दिया।
 

सवाई जयसिंह ने 1728 में बनाया था

जयपुर-आगरा हाईवे पर स्थित इस स्मारक को महाराजा सवाई जयसिंह ने 1728 में बनाया था। यह स्मारक मुगल और भारतीय कला का बेहतरीन नमूना है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि एनजीटी द्वारा वहां पर पूरी तरह पाबंदी लगाना सही नहीं है। कोर्ट ने कहा कि पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए वहां उचित समारोह किया जा सकता है।



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