Amit Shah Gave All The Powers To The States In Unlock 1.0, Chief Minister Agreed To Do It Quickly – अनलॉक 1.0 में अमित शाह ने राज्यों को दिए सारे अधिकार, मुख्यमंत्री ने फटाफट जता दी सहमति

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
– फोटो : एएनआई (फाइल)

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कोरोना संक्रमण के चलते लागू हुए लॉकडाउन 1.0 से लेकर 4.0 तक केंद्र सरकार अपने स्तर पर गाइडलाइंस जारी करती रही। जब अनलॉक 1.0 की बात आई तो केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यों को सारे अधिकार दे दिए।

हालांकि इस दौरान आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 से लेकर 60 के सभी प्रावधान लागू किए गए हैं। कंटेनमेंट जोन में 30 जून तक पाबंदियां जारी रहेंगी, लेकिन राज्य अपने मूल्यांकन के मुताबिक पाबंदियां लगा सकते हैं, यह अधिकार उन्हें दिया गया है।

राज्य अपने स्तर पर कोरोना के जोन भी तय कर सकेंगे। सरकारी और प्राइवेट संस्थान कैसे खुलेंगे, उद्योग धंधे का कामकाज किस तरह गति पकड़े, यह सभी राज्यों को तय करना होगा।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जब मुख्यमंत्रियों से बात की, तो उनका हैरानी वाला उतावलापन देखा गया। तकरीबन सभी मुख्यमंत्री किसी भी तरह के लॉकडाउन पर आगे बढ़ने की जगह अनलॉक 1.0 पर सहमत होते नजर आए।
 

अनलॉक 1.0 से पहले जब चार लॉकडाउन लागू हुए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद आगे आकर मुख्यमंत्रियों से बातचीत की थी। इस बार अमित शाह ने मुख्यमंत्रियों के साथ लॉकडाउन की स्थिति पर विचार विमर्श किया।

केंद्र सरकार के उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने मुख्यमंत्रियों को फ्री हैंड दे दिया था। ऐसा कोई मुख्यमंत्री नहीं था जो अनलॉक पर असहमत दिखा हो।

खास बात यह रही कि न केवल भाजपा शासित प्रदेशों के सीएम अनलॉक 1.0 को लेकर उत्साहित थे, बल्कि गैर भाजपाई सीएम भी इस मामले में उनके साथ खड़े नजर आए।

अमित शाह ने जब मुख्यमंत्रियों से बात की, तो पहले उन्हीं की राय पूछी गई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केवल इतना कहा था कि कंटेनमेंट जोन में जो भी कामकाज होगा, उसके लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ती तरफ से जारी नियमावली का पालन किया जाए।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को मुख्यमंत्रियों से कोविड-19 की स्थिति को लेकर बात की थी।

इन बातों पर जताई सहमति

अनलॉक 1.0 में धार्मिक स्थानों की स्थिति क्या रहेगी, इस बाबत राज्यों की ओर से ही सवाल उठाया गया था। सभी मुख्यमंत्री इस पर सहमत थे कि स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार धार्मिक स्थलों को खोल दिया जाए।

राज्यों की ओर से कहा गया कि पहले ट्रांसपोर्ट व्यवस्था लाइन पर आ जाए, इसलिए धार्मिक स्थलों को एक जून से नहीं खोला जाएगा। यही वजह रही कि धार्मिक स्थान या लोगों के लिए प्रार्थनास्थल आठ जून से खोले जाएंगे।

राज्यों को होटल, रेस्टोरेंट और दूसरी हॉस्पिटैलिटी सर्विसेज शुरू करने का अधिकार दे दिया गया। शॉपिंग मॉल्स को भी आठ जून से खोलने के लिए सभी राज्य एकमत थे।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया कि अनलॉक 1.0 के फेज 2 में स्कूल, कॉलेज, शैक्षणिक, ट्रेनिंग और कोचिंग संस्थान आदि को खोला जाए और इसके लिए राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्र की सलाह माननी होगी।

इस पर सभी राज्य तैयार हो गए। राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश के अधिकारी अभिभावकों व हितधारकों के साथ परामर्श करेंगे।

उनका फीडबैक मिलने के बाद इन संस्थानों को दोबारा खोले जाने का फैसला जुलाई में लिया जाएगा।

इंटर-स्टेट और इंट्रा स्टेट आवाजाही पर कोई पाबंदी नहीं रहेगी। राज्यों को इसके लिए किसी तरह की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है।

सार

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जब मुख्यमंत्रियों से बात की, तो उनका हैरानी वाला उतावलापन देखा गया। तकरीबन सभी मुख्यमंत्री किसी भी तरह के लॉकडाउन पर आगे बढ़ने की जगह अनलॉक 1.0 पर सहमत होते नजर आए…

विस्तार

कोरोना संक्रमण के चलते लागू हुए लॉकडाउन 1.0 से लेकर 4.0 तक केंद्र सरकार अपने स्तर पर गाइडलाइंस जारी करती रही। जब अनलॉक 1.0 की बात आई तो केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यों को सारे अधिकार दे दिए।

हालांकि इस दौरान आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 से लेकर 60 के सभी प्रावधान लागू किए गए हैं। कंटेनमेंट जोन में 30 जून तक पाबंदियां जारी रहेंगी, लेकिन राज्य अपने मूल्यांकन के मुताबिक पाबंदियां लगा सकते हैं, यह अधिकार उन्हें दिया गया है।

राज्य अपने स्तर पर कोरोना के जोन भी तय कर सकेंगे। सरकारी और प्राइवेट संस्थान कैसे खुलेंगे, उद्योग धंधे का कामकाज किस तरह गति पकड़े, यह सभी राज्यों को तय करना होगा।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जब मुख्यमंत्रियों से बात की, तो उनका हैरानी वाला उतावलापन देखा गया। तकरीबन सभी मुख्यमंत्री किसी भी तरह के लॉकडाउन पर आगे बढ़ने की जगह अनलॉक 1.0 पर सहमत होते नजर आए।
 

अनलॉक 1.0 से पहले जब चार लॉकडाउन लागू हुए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद आगे आकर मुख्यमंत्रियों से बातचीत की थी। इस बार अमित शाह ने मुख्यमंत्रियों के साथ लॉकडाउन की स्थिति पर विचार विमर्श किया।

केंद्र सरकार के उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने मुख्यमंत्रियों को फ्री हैंड दे दिया था। ऐसा कोई मुख्यमंत्री नहीं था जो अनलॉक पर असहमत दिखा हो।

खास बात यह रही कि न केवल भाजपा शासित प्रदेशों के सीएम अनलॉक 1.0 को लेकर उत्साहित थे, बल्कि गैर भाजपाई सीएम भी इस मामले में उनके साथ खड़े नजर आए।

अमित शाह ने जब मुख्यमंत्रियों से बात की, तो पहले उन्हीं की राय पूछी गई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केवल इतना कहा था कि कंटेनमेंट जोन में जो भी कामकाज होगा, उसके लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ती तरफ से जारी नियमावली का पालन किया जाए।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को मुख्यमंत्रियों से कोविड-19 की स्थिति को लेकर बात की थी।

इन बातों पर जताई सहमति

अनलॉक 1.0 में धार्मिक स्थानों की स्थिति क्या रहेगी, इस बाबत राज्यों की ओर से ही सवाल उठाया गया था। सभी मुख्यमंत्री इस पर सहमत थे कि स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार धार्मिक स्थलों को खोल दिया जाए।

राज्यों की ओर से कहा गया कि पहले ट्रांसपोर्ट व्यवस्था लाइन पर आ जाए, इसलिए धार्मिक स्थलों को एक जून से नहीं खोला जाएगा। यही वजह रही कि धार्मिक स्थान या लोगों के लिए प्रार्थनास्थल आठ जून से खोले जाएंगे।

राज्यों को होटल, रेस्टोरेंट और दूसरी हॉस्पिटैलिटी सर्विसेज शुरू करने का अधिकार दे दिया गया। शॉपिंग मॉल्स को भी आठ जून से खोलने के लिए सभी राज्य एकमत थे।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया कि अनलॉक 1.0 के फेज 2 में स्कूल, कॉलेज, शैक्षणिक, ट्रेनिंग और कोचिंग संस्थान आदि को खोला जाए और इसके लिए राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्र की सलाह माननी होगी।

इस पर सभी राज्य तैयार हो गए। राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश के अधिकारी अभिभावकों व हितधारकों के साथ परामर्श करेंगे।

उनका फीडबैक मिलने के बाद इन संस्थानों को दोबारा खोले जाने का फैसला जुलाई में लिया जाएगा।

इंटर-स्टेट और इंट्रा स्टेट आवाजाही पर कोई पाबंदी नहीं रहेगी। राज्यों को इसके लिए किसी तरह की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है।



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