After Pmo’s Intervention, Every State Will Now Get Vehicles, States Will Have To Take These Steps – पीएमओ के हस्तक्षेप के बाद अब हर राज्य को मिलेंगी गाड़ियां, राज्यों को उठाने होंगे बस ये कदम

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श्रमिक स्पेशल ट्रेन
– फोटो : AmarUjala (सांकेतिक)

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लॉकडाउन के दौरान मजदूरों की खराब स्थिति के मद्देनजर प्रधानमंत्री कार्यालय को हस्तक्षेप करना पड़ा। कैबिनेट सेक्रेटरी राजीव गौबा ने खुद सभी राज्यों के मुख्यसचिवों और पुलिस महानिदेशकों से बातचीत की।

इस दौरान एक बात सभी राज्यों की ओर से सामने आई कि ट्रेनों के आवागमन की मंजूरी देने में कहीं न कहीं अनावश्यक देरी हो रही है। जिला या मंडल स्तर से ट्रेन के लिए भेजा गया आवेदन जब तक राज्यों की ऊपरी इकाई तक पहुंचता है, तब तक बहुत देर हो जाती है।

अधिकांश राज्यों के मुख्य सचिव इस बात के लिए तैयार हो गए कि अगर जिला प्रशासन के पास पर्याप्त क्वारंटीन सेंटर एवं मेडिकल सुविधा है तो वे अपने स्तर पर ट्रेन का आवेदन सीधे रेल मंत्रालय को भेज सकते हैं।

साथ ही पीएमओ की सलाह पर ही राज्यों को ये निर्देश दिए गए हैं कि मजदूरों को ले जा रहे वाहनों को बीच में कुछ देर के लिए रोका जाए। इसके लिए यात्रा का रूट चार्ट पहले से ही संबंधित राज्यों को देना होगा।
 

बता दें कि लॉकडाउन के दौरान मजदूरों की दयनीय स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर चारों तरफ से दबाव बढ़ता जा रहा था। चोरी छिपे ट्रक में बैठ कर जा रहे कई दर्जन श्रमिक सड़क हादसे में मारे गए। इसके बाद पीएमओ में एक बैठक हुई, जिसमें गृह मंत्रालय, रेल मंत्रालय, सड़क परिवहन और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने भाग लिया।

केंद्रीय गृह मंत्रालय में कार्यरत एक आला अधिकारी के मुताबिक, इस बैठक के बाद ही कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुख्यसचिवों के साथ बातचीत की। उन्होंने कहा कि अब श्रमिक स्पेशल ट्रेन आवेदन का तरीका बदला जाए।

आवेदन की फाइल अब सीएम कार्यालय या मुख्यसचिव के दफ्तर से क्लीयर होने की बजाए जिला स्तर पर उसका निपटारा हो। डीसी जो कि अधिकांश जिलों में ट्रेन शुरु कराने के लिए नोडल अधिकारी बनाए गए हैं, वे अब खुद यह निर्णय लेंगे कि जिले के लिए कितनी श्रमिक स्पेशल ट्रेन जरूरी हैं।

साथ ही अब सड़क मार्ग से मजदूरों को ले जाने वाली बसें बीच रास्ते में विश्राम के लिए रोकी जाएंगी। इसके लिए सड़क किनारे पर या उसके आसपास किसी जगह पर यात्रियों के ठहरने एवं खाने पीने का इंतजाम होगा।

वहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाएगा और सैनिटाइजर की व्यवस्था रहेगी। बस को भी दोबारा से सैनिटाइज किया जाएगा। रेल विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि अभी तक 21 लाख से अधिक कामगारों को 1,570 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में उनके घर भेजा गया है। इस सप्ताह गाड़ियों की संख्या 25 सौ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

 

लॉकडाउन के दौरान मजदूरों की खराब स्थिति के मद्देनजर प्रधानमंत्री कार्यालय को हस्तक्षेप करना पड़ा। कैबिनेट सेक्रेटरी राजीव गौबा ने खुद सभी राज्यों के मुख्यसचिवों और पुलिस महानिदेशकों से बातचीत की।

इस दौरान एक बात सभी राज्यों की ओर से सामने आई कि ट्रेनों के आवागमन की मंजूरी देने में कहीं न कहीं अनावश्यक देरी हो रही है। जिला या मंडल स्तर से ट्रेन के लिए भेजा गया आवेदन जब तक राज्यों की ऊपरी इकाई तक पहुंचता है, तब तक बहुत देर हो जाती है।

अधिकांश राज्यों के मुख्य सचिव इस बात के लिए तैयार हो गए कि अगर जिला प्रशासन के पास पर्याप्त क्वारंटीन सेंटर एवं मेडिकल सुविधा है तो वे अपने स्तर पर ट्रेन का आवेदन सीधे रेल मंत्रालय को भेज सकते हैं।

साथ ही पीएमओ की सलाह पर ही राज्यों को ये निर्देश दिए गए हैं कि मजदूरों को ले जा रहे वाहनों को बीच में कुछ देर के लिए रोका जाए। इसके लिए यात्रा का रूट चार्ट पहले से ही संबंधित राज्यों को देना होगा।
 

बता दें कि लॉकडाउन के दौरान मजदूरों की दयनीय स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर चारों तरफ से दबाव बढ़ता जा रहा था। चोरी छिपे ट्रक में बैठ कर जा रहे कई दर्जन श्रमिक सड़क हादसे में मारे गए। इसके बाद पीएमओ में एक बैठक हुई, जिसमें गृह मंत्रालय, रेल मंत्रालय, सड़क परिवहन और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने भाग लिया।

केंद्रीय गृह मंत्रालय में कार्यरत एक आला अधिकारी के मुताबिक, इस बैठक के बाद ही कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुख्यसचिवों के साथ बातचीत की। उन्होंने कहा कि अब श्रमिक स्पेशल ट्रेन आवेदन का तरीका बदला जाए।

आवेदन की फाइल अब सीएम कार्यालय या मुख्यसचिव के दफ्तर से क्लीयर होने की बजाए जिला स्तर पर उसका निपटारा हो। डीसी जो कि अधिकांश जिलों में ट्रेन शुरु कराने के लिए नोडल अधिकारी बनाए गए हैं, वे अब खुद यह निर्णय लेंगे कि जिले के लिए कितनी श्रमिक स्पेशल ट्रेन जरूरी हैं।

साथ ही अब सड़क मार्ग से मजदूरों को ले जाने वाली बसें बीच रास्ते में विश्राम के लिए रोकी जाएंगी। इसके लिए सड़क किनारे पर या उसके आसपास किसी जगह पर यात्रियों के ठहरने एवं खाने पीने का इंतजाम होगा।

वहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाएगा और सैनिटाइजर की व्यवस्था रहेगी। बस को भी दोबारा से सैनिटाइज किया जाएगा। रेल विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि अभी तक 21 लाख से अधिक कामगारों को 1,570 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में उनके घर भेजा गया है। इस सप्ताह गाड़ियों की संख्या 25 सौ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

 



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